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त्रिजटा: राक्षसी से देवी तक Trijata: From demon to Goddess

दोस्तों, आज हम बात करेंगे त्रिजटा के बारे में। रामायण का यह एक ऐसा पात्र है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है।

त्रिजटा को सीताजी ने बड़े प्रेम से मां कहा था। यह सौभाग्य और किसी को कभी नहीं मिला! सीताजी ने त्रिजटा से न केवल अपनी व्यथा सुनाई, बल्कि चिता जलाने के लिए मदद भी मांगी!त्रिजटा ने समझाया और मनाया।ठीक उसी तरह जैसे एक मां अपनी बेटी को डांटकर प्रेम से समझाती है।ये अवसर भी किसी और को नहीं मिला!

दोस्तों, श्रीराम को अवतार और सीताजी को उनकी शक्ति बताया गया है। परमशक्ति भी किसी से सहायता मांग बैठे, यह प्रसंग आपको कहीं नहीं मिलेगा!

ऐसे वर्णन मिलते हैं कि त्रिजटा एक राक्षसी थी! रावण की सेविका थी! लेकिन बाद में उसका एक आदर्श स्वरूप देखने को मिलता है!

दोस्तों, आज के इस लेख में हम उन घटनाओं एवं परिस्थितियों को देखेंगे जिन्होंने एक साधारण सेविका को रामकथा में एक बहुत ऊंचे और श्रद्धेय स्थान की अधिकारिणी बनाया।

आईए, शुरू करते हैं।

त्रिजटा के पूर्वज शुरू से ही लंका राज्य के सेवक रहे थे। त्रिजटा ने भी कुलपरंपरा के अनुसार रावण की सेवा की। वृद्धा वस्था आने पर उसे एक आरामदायक और सम्मानित पद दिया गया। वह …

जटायु: एक अप्रतिम नायक Jatayu: An Unmatched Hero

दोस्तों, आज हम श्रीरामचरितमानस पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।
कहते हैं, रामकथा में मानव की सारी समस्याओं के समाधान छिपे हैं। महात्मा गांधी सहित अनेक भारतीय और विदेशी महापुरुषों, विद्वानों तथा विचारकों ने रामराज्य की अवधारणा को प्रशासन का सर्वोत्तम रूप माना है जो रामकथा में वर्णित सिद्धान्तों पर आधारित है।
रामकथा में एक महत्वपूर्ण पात्र है जटायु। वृद्ध लेकिन बलशाली। पद से राजा लेकिन मन से संन्यासी! अधर्म का विरोध करते हुए अपने प्राण देनेवाला कर्मयोगी!


जटायु का जन्म एक विख्यात वंश में हुआ था। उनके पिता अरुण भगवान सूर्य के सारथी थे। शिक्षा पूरी होने के बाद उन्हें पंचवटी एवं नासिक क्षेत्र में निवास करने वाली एक जनजाति का अधिपति बनाया गया जिसका प्रतीक चिन्ह गिद्ध था। इस कारण से उन्हें गिद्धराज जटायु भी कहा जाता है।

दोस्तों, यहाँ एक सवाल लेते हैं। फिल्मों और धारावाहिकों में तो जटायु को पक्षी दिखाया गया है!उन्हें गिद्ध बताया गया है। तो क्या जटायु एक पक्षी थे?

नहीं दोस्तों, बिल्कुल नहीं। यह एक भ्रम मात्र है। वास्तव में जटायु एक जनजातीय राजा थे। उनका प्रतीक चिन्ह गिद्ध था। जिस तरह हम ऑस्ट्रेलि…

भगीरथ : भारत बदलने वाले नायक Bhagirath: The legend who changed India

दोस्तों, आज हम भगीरथ के बारे में बात करेंगे। मान्यता है कि भगीरथ ही गंगा नदी को इस भारतभूमि पर लेकर आये थे। इस अप्रतिम कार्य को करने के कारण वह भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े नायकों में अपना स्थान रखते हैं।

आइये, आज इस लेख में हम संक्षिप्त रूप में भगीरथ के प्रयासों, कार्यों एवं उन घटनाओं की चर्चा करेंगे जिनके चलते गंगा नदी का इस भारतभूमि पर अवतरण हुआ। इस पौराणिक कथा में छिपे उन भौगोलिक और वैज्ञानिक तथ्यों की चर्चा भी हम करेंगे जो धार्मिक आस्था के पीछे छिपे होने के कारण अक्सर हमें नजर नहीं आते।

चलिए, शुरू करते हैं।
भगीरथ कोई आम इंसान नहीं थे। वह राजा थे।परम प्रतापी राजा दिलीप के पुत्र थे। भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली राज्यों में से एक अयोध्या के सम्राट थे।
लेकिन एक बात उन्हें हमेशा दुखी करती रहती थी। दरअसल, कई पीढ़ी पहले राजा सगर नाम के एक पूर्वज थे। उनके सगर नाम रखे जाने के पीछे एक कारण था। सगर का अर्थ होता है विष से भरा व्यक्ति। जब वे अपनी माता के गर्भ में थे तभी उन्हें विष देकर मारने का प्रयास हुआ था। उस समय महर्षि च्यवन ने सही चिकित्सा करके उनकी माता की रक्षा की थी। आगे जाकर जब सगर जन्म…