Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2019

शिवरुद्राष्टक: महादेव का अमोघ स्रोत्र

मित्रों, आप लोगो के द्वारा दिया जा रहा प्रेम और स्नेह मुझे विश्वास दिला रहा है कि यह वेबसाइट आपकी उम्मीदों के अनुसार कार्य कर पा रही है।
पिछले दिनों मैंने श्री कागभुशुण्डि जी के बारे में लिखा था। उसमें एक जगह  भगवान महादेव की अमोघ स्तुति शिवरूद्राष्टक के बारे में लिखा गया था जिसका पाठ करने से  भगवान शिव की कृपा तुरंत प्राप्त होती है तथा हमारा मन-मष्तिष्क सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है।

आपमें से अनेक पाठकों के अनुरोध मुझे प्राप्त हो रहे हैं कि इस  स्त्रोत के बारे में विस्तृत रूप से लिखूं।
यकीन मानिए।मैंने लिखना चाहा, पर हिम्मत नहीं जुटा पाया। शिव की भक्ति को शब्दों में समेटना असंभव है।मैंने सारे अनुरोधों को हाथ जोड़कर किनारे कर दिया।

लेकिन, एक पाठक ने गजब का आग्रह कर डाला! उन्होंने कहा -" जो जी में आये,बस लिख डालो!जबतक लिखोगे, शिव का ही स्मरण होगा! जो भी लोग तुम्हारा लिखा पढ़ेंगे, उतनी देर शिव को ही याद करेंगे!!शिव कृपा से ही उनका स्मरण करने का मौका मिलता है।" उनकी बात मुझे अकाट्य लगी। महादेव को याद करके मैंने कलम उठाई।जो होगा देखा जाएगा!


चलिये, आज बात करते हैं श्री रुद्राष्टक …

खजुराहो : चन्देलों की गौरव गाथा Khajuraho: The Pride Epitome of Chandela Kings

मित्रों, सबसे पहले आप सब का आभार। आपने अपनी इस वेबसाइट को बहुत प्यार दिया है।
आइये।आज खजुराहो चलते हैं। यह बड़ा ही विशिष्ट स्थल है।इसके नाम से ही कुछ लोग नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं।वहीं कुछ लोगों के होठों पर मुस्कान आ जाती है।


ऐसा क्यों है?ऐसा इस वजह से है कि हम भारतवासियों ने कभी खजुराहों को अपनी नजर से देखा ही नहीं।विदेशी लोग यहां बड़ी संख्या में आते हैं। यहां के बारे में विदेशियों ने बहुत कुछ लिखा भी है! और हम भारतवासी उनकी बातों पर भरोसा करके उनके नजरिये से ही इस ऐतिहासिक स्थल को देखते आये हैं।त्याग और आध्यात्मिकता का संदेश देने वाले यहां के मंदिरों को विदेशी लेखकों के प्रभाव में आकर हम भोगवादी संस्कृति का पोषक मान बैठे हैं!
चलिए, आज की यात्रा हम एक अलग नजरिये के साथ करेंगे।यहां के बारे में पूरा सच जानेंगे जो अभी तक अधिकांश लोगों की नजर से ओझल रहा है। बस आप मेरे साथ बने रहें।
पहले कुछ इतिहास की बात करते हैं जिसे हम इसी लेख में आगे जाकर वर्तमान से भी जोड़ेंगे।
हजार साल पहले की बात है। उस समय भारत सैंकड़ों  छोटे-बड़े राज्यों में बंटा था। इनपर अलग अलग राजवंशों का शासन था। बुंदेलखंड और मध्य…