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Showing posts from October, 2019

सम्राट भरत: जिन्होंने बनाया हमारा भारत !Emperor Bharat: who built The Indian Nation

दोस्तों, आज हम बात करेंगे सम्राट भरत की।उन महान शासक के बारे में जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत रखा गया।
सम्राट भरत ने अलग अलग फैले आर्यावर्त के कबीलों को एक सूत्र में बांधकर एक सार्वभौमिक राष्ट्र बनाया। आम आदमी के उत्थान पर केंद्रित नीतियां बनायीं। यह मर्यादा बनाई कि राजा ईश्वर का एक प्रतिनिधि है जिसका कार्य जनता  की सुरक्षा और उसका विकास करना है।चक्रवर्ती सम्राट भरत का साम्राज्य हिमालय से लेकर समुद्र के बीच फैला था। यहां की संतानों को भारती अथवा भारतीय कहे जाने की परंपरा तभी से शुरू हुई, जो आज भी जारी है।

भारत के इस महान चक्रवर्ती सम्राट का जन्म कण्वाश्रम में हुआ था। उनका लालन पालन महान ऋषि कण्व के सान्निध्य में हुआ। कण्व ऋषि के इस आश्रम का वर्णन स्कन्द पुराण एवं महाकवि कालिदास की रचनाओं में विस्तृत रूप से आता है।

आज हम इसी पावन स्थली कण्व आश्रम की चर्चा करेंगे जहां जाना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होना चाहिए।

लेकिन वहां जाकर मुझे जो दिखा, एक भारतीय के तौर पर हम सभी को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है।

शुरुआत करते हैं एक कहानी से। पता नहीं सच है या काल्पनिक। जैसी सुनी , वैसे ह…

श्रीहनुमान चालीसा: योग के संदर्भ में परिचय Srihanuman Chalisa: Understanding in Yogic context

मित्रों, आज हम चर्चा करेंगे उस चौपाई की जिससे श्रीहनुमान चालीसा शुरू होती है।

" जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीश तिहुँ लोक उजागर।।"

आइये , अब इसका शाब्दिक अर्थ समझें।

" उन हनुमान जी की जय हो, जो ज्ञान और गुणों के सागर हैं। कपियों के अधिपति अर्थात हनुमानजी की जय हो जो तीनों लोकों में उजागर अर्थात प्रसिद्ध हैं"

मित्रों, अब हम इसके भावार्थ को देखेंगे। एक एक शब्द में छिपे गहन अर्थ को समझने का प्रयास करेंगे।

सबसे पहले " जय हनुमान" कहकर हनुमानजी की जयकार की गई है। ऐसा क्यों?
आइये एक उदाहरण से समझें। क्या आप किसी राजनीतिक रैली में गए हैं! वहां क्या होता है? जैसे ही कोई बड़े नेता आते हैं, जनता जिंदाबाद के नारे लगाती है।हर तरफ जोश ही जोश दिखने लगता है!
ऐसा क्यों किया जाता है?
ऐसा इसलिए किया जाता है कि नेता अथवा नायक को उसके बल का भान कराया जा सके। जब किसी को अपनी शक्तियों के ऊपर विश्वास हो, तभी वह किसी अभियान को उचित दिशा दे सकता है एवं जनसमूह का नेतृत्व कर सकता है। नायक जब अपनी शक्तियों पर भरोसा करते हुए जनसामान्य का आह्वान करता है तो उसका जोश एवं उसके गुण उसके अ…