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Showing posts from June, 2019

योग और वैज्ञानिक सोच: Yoga and Scientific Thinking

दोस्तों, आज हम एक अति महत्वपूर्ण विषय पर बात करेंगे। योगविज्ञान के एक जटिल सिद्धांत को समझेंगे जो हमारे जीवन में बहुत उपयोगी है। यह कई प्रकार की समस्याओं से हमें बचाता है।

आइये, एक कहानी से शुरू करें जो भगवान बुद्ध से जुड़ी है।

भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। जहां भी जाते, भीड़ जुट जाती! लोग उनके उपदेशों को सुनकर कृतार्थ होते।
उस वक़्त एक परंपरा थी। साधु- महात्मा लोग गृहस्थों के यहां भिक्षा मांगकर भोजन करते थे। यह परंपरा हम आज भी भारत के कुछ क्षेत्रों में देख सकते हैं।

भगवान बुद्ध के कुछ शिष्य भिक्षा मांगने एक नगर में पहुंचे। वहां एक विचित्र घटना देखने को मिली। नगर के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति ने एक बहुत ऊंचा खंभा गड़वाकर शिखर पर एक थैली रखवाई थी। घोषणा थी कि जो भी व्यक्ति उस खंभे पर चढ़कर थैली उतारेगा, उसे ढेर सारा इनाम मिलेगा। बहुतों ने कोशिश की! पर सफल कोई नहीं हुआ।

लोगों ने भिक्षुओं से आग्रह किया कि योगबल से उस खंभे पर चढ़कर थैली उतारें और उस व्यक्ति का गर्व चूर करें! लोगों का मानना था कि ये असंभव सा कार्य कोई सिद्ध योगी ही कर सकता है।

दोस्तों, अब थोड़ा रुकिए। उन भिक्षुओं की…

अयोध्या: हमारे गौरव की भूमि Ayodhya: The Land of Pride

दोस्तों, विश्वास है आप सभी स्वस्थ और सानंद हैं।

कुछ दिन पहले मुझे अयोध्या जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हिन्दू धर्म में सात नगरों को सबसे अधिक पवित्र और महत्वपूर्ण कहा गया है। इनमें अयोध्या प्रथम स्थान पर आता है।इसे तीर्थरूपी विष्णु का मस्तक कहा गया है! श्रीरामचन्द्रजी का यह नगर आदिकाल से ही भारतीयों की आस्था का केंद्र रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तथा गुजरात से अरुणाचल तक के लोग यहां आकर पुण्यलाभ करते हैं। जो भी दिल में श्रद्धा लेकर यहां आता है, वह रामजी का ही हो जाता है! यहां के वातावरण में व्याप्त रामभक्ति की तरंगें उसके सारे कष्टों को दूर करके उसमें नई ऊर्जा भर देती हैं।

मित्रों, आज हम इसी परम पावन अयोध्या नगरी के इतिहास को अच्छे से जानेंगे। एक समय यह नगर भारत की समृद्धि, सभ्यता और ज्ञान का केंद्र था। इसके बाद इसपर एक के बाद एक आक्रमण हुए और यह कमजोर होता गया। एक दिन वह भी आया जब इस नगर को नष्ट कर दिया गया।सैकडों सालों तक  यह विलुप्त रहा! फिर सम्राट विक्रमादित्य ने इस नगर को ढूंढकर इसे फिर से बसाया। इसके बाद भी इसने काफी उतार चढ़ाव देखे। बार बार मिटता और बनता रहा। गुलामवंश और मुगलव…

जटायु: एक अप्रतिम नायक Jatayu: An Unmatched Hero

दोस्तों, आज हम श्रीरामचरितमानस पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।
कहते हैं, रामकथा में मानव की सारी समस्याओं के समाधान छिपे हैं। महात्मा गांधी सहित अनेक भारतीय और विदेशी महापुरुषों, विद्वानों तथा विचारकों ने रामराज्य की अवधारणा को प्रशासन का सर्वोत्तम रूप माना है जो रामकथा में वर्णित सिद्धान्तों पर आधारित है।
रामकथा में एक महत्वपूर्ण पात्र है जटायु। वृद्ध लेकिन बलशाली। पद से राजा लेकिन मन से संन्यासी! अधर्म का विरोध करते हुए अपने प्राण देनेवाला कर्मयोगी!


जटायु का जन्म एक विख्यात वंश में हुआ था। उनके पिता अरुण भगवान सूर्य के सारथी थे। शिक्षा पूरी होने के बाद उन्हें पंचवटी एवं नासिक क्षेत्र में निवास करने वाली एक जनजाति का अधिपति बनाया गया जिसका प्रतीक चिन्ह गिद्ध था। इस कारण से उन्हें गिद्धराज जटायु भी कहा जाता है।

दोस्तों, यहाँ एक सवाल लेते हैं। फिल्मों और धारावाहिकों में तो जटायु को पक्षी दिखाया गया है!उन्हें गिद्ध बताया गया है। तो क्या जटायु एक पक्षी थे?

नहीं दोस्तों, बिल्कुल नहीं। यह एक भ्रम मात्र है। वास्तव में जटायु एक जनजातीय राजा थे। उनका प्रतीक चिन्ह गिद्ध था। जिस तरह हम ऑस्ट्रेलि…