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Showing posts from May, 2019

परशुराम: एक जननायक Lord Parshuram: A Legendary Hero

आज बात करते हैं, परशुराम के बारे में। इनका व्यक्तित्व बड़ा ही विलक्षण है! हजारों युग आए और गए! लेकिन इनकी कथा हर समय कही- सुनी जाती रही है! इन्हें चिरंजीवी भी कहा जाता है क्योंकि इनकी लोकप्रियता और व्यक्तित्व समय और काल से परे रहे हैं। हर युग में इनकी उपस्थिति मानी गयी है।

परशुराम अपने समय के सबसे बड़े विद्वान ऋषियों में थे। लेकिन एक अनूठी बात थी! वो अपने समय के सबसे बड़े योद्धाओं में भी गिने जाते थे। शास्त्र और शस्त्र का यह संगम और किसी में आज तक नहीं देखा गया! हमेशा युद्ध के लिए उत्सुक रहने वाला यह परम क्रोधी ब्रम्हज्ञानी ऋषि तत्कालीन जनता के लिए श्रद्धा  का एवं तत्कालीन राजाओं के लिए भय का विषय था! जब जब राजाओं ने उनसे टक्कर ली, विनाश को ही प्राप्त हुए!

प्रमाणों के अनुसार, वे आरंभिक जीवन में बड़े सरल, विनम्र करुणाशील एवं अंतर्मुखी युवा थे! ब्रम्हज्ञान की धुन में लीन यह युवा आश्रम की भीड़ का ही एक हिस्सा था!



दोस्तों, आज हम इन्हीं परशुरामजी के विषय मे चर्चा करेंगे। देखेंगे, आखिर वो कौन सी परिस्थितियां थीं, जिन्होंने एक सीधे सरल छात्र को युग का सबसे अजेय योद्धा बना दिया! इतना बड़ा योद्धा, …

निःस्वार्थ सेवा: शक्ति का स्त्रोत Selfless service : Source of Innerpower

मित्रों, आज हम श्रीरामचरितमानस का एक सूत्र लेंगे और उसमें निहित योगविज्ञान के सिद्धांत को समझेंगे। आज इस सूत्र के माध्यम से हम इस बात को समझेंगे कि हर धर्म में असहायों एवं दुखियों की मदद करने की बात क्यों कही गयी है।योगविज्ञान के इस सिद्धांत से हम इस बात को भी समझेंगे की कैसे किसी असहाय को की गई मदद अन्ततः कई गुना बनकर हमें ही मिल जाती है!


आइये, शुरू करते हैं।
हम बचपन से ही सीखते आये हैं। दुखियों एवं असहायों की मदद करो। दुनिया के सारे धर्मों में ये बात मिलती है।
आज हम एक सवाल लेते हैं! आखिर यह सीख क्यों दी जाती है? इसका आधार क्या है? किसी दुखी एवं लाचार की मदद हमें क्यों करनी चाहिए?
चलिए, उत्तर ढूंढते हैं।
श्रीरामचरितमानस का एक सूत्र है-                   " गिरा अरथ जल बीचि सम                     कहियत भिन्न न भिन्न                     बंदउ सीता राम पद                     जिन्हहिं परम प्रिय खिन्न।।" " इसका अर्थ क्या है?" " जिस तरह वाणी और उसका अर्थ एक ही लगता है, जल और उसकी तरंगे एक ही दिखती हैं। उसी तरह हमें सीता राम को एक ही मानना चाहिए जिन्हें सबसे प्रिय ख…

त्रिजटा: राक्षसी से देवी तक Trijata: From demon to Goddess

दोस्तों, आज हम बात करेंगे त्रिजटा के बारे में। रामायण का यह एक ऐसा पात्र है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है।

त्रिजटा को सीताजी ने बड़े प्रेम से मां कहा था। यह सौभाग्य और किसी को कभी नहीं मिला! सीताजी ने त्रिजटा से न केवल अपनी व्यथा सुनाई, बल्कि चिता जलाने के लिए मदद भी मांगी!त्रिजटा ने समझाया और मनाया।ठीक उसी तरह जैसे एक मां अपनी बेटी को डांटकर प्रेम से समझाती है।ये अवसर भी किसी और को नहीं मिला!

दोस्तों, श्रीराम को अवतार और सीताजी को उनकी शक्ति बताया गया है। परमशक्ति भी किसी से सहायता मांग बैठे, यह प्रसंग आपको कहीं नहीं मिलेगा!

ऐसे वर्णन मिलते हैं कि त्रिजटा एक राक्षसी थी! रावण की सेविका थी! लेकिन बाद में उसका एक आदर्श स्वरूप देखने को मिलता है!

दोस्तों, आज के इस लेख में हम उन घटनाओं एवं परिस्थितियों को देखेंगे जिन्होंने एक साधारण सेविका को रामकथा में एक बहुत ऊंचे और श्रद्धेय स्थान की अधिकारिणी बनाया।

आईए, शुरू करते हैं।

त्रिजटा के पूर्वज शुरू से ही लंका राज्य के सेवक रहे थे। त्रिजटा ने भी कुलपरंपरा के अनुसार रावण की सेवा की। वृद्धा वस्था आने पर उसे एक आरामदायक और सम्मानित पद दिया गया। वह …

तुलसीदास: भारत के महान संत Tulsidas: The Great Sage of India

दोस्तों, आज हम बात करेंगे भक्तकवि तुलसीदास जी के बारे में। उनकी रचनाओं हनुमानचालीसा और रामचरितमानस को हर दिन करोड़ों लोग पढ़ते और सुनते हैं। वह भारतीय संस्कृति के आधारभूत स्तंभों में एक हैं।

इतिहास कहता है, तुलसीदास जी बिल्कुल साधारण परिवार से थे। जन्म के तुरंत बाद ही मां- बाप से वंचित हो गए। किसी तरह जीवन चला। युवा होने पर धार्मिक कथावाचक बने।

आज के इस लेख में हम उन घटनाओं और परिस्थितियों को देखेंगे जिन्होंने एक साधारण कथावाचक को इतिहास का सबसे बड़ा भक्तकवि बना दिया!
खुद तुलसीदास जी के शब्दों में- " घर घर मांगे टूक पुनि, भूपति पूजे पाय। जे तुलसी तब राम विमुख, ते अब राम सहाय"
" मतलब?"
" जब राम का ज्ञान नहीं था, तो घर घर भीख मांगकर खाना पड़ता था। जब से राम का ज्ञान हुआ है, राजा लोग भी मेरे पैर दबाने लगे हैं"

आइये, शुरू से देखते हैं।


तुलसी का जन्म अति साधारण परिवार में हुआ।दुखद स्थितियों में हुआ।जन्म के दूसरे ही दिन माता हुलसी का देहांत हो गया।मान्यता है, जन्म के समय उनके मुंह में दांत आ चुके थे।बालक के रोने की आवाज़ भी विचित्र थी। गाँव देहात के अंधविश्वासी लोग…

श्रीराम और बालि की कथा: एक व्यासकूट Vyaskoot: Decoding the story of Sriram and Bali

दोस्तों,आज हम एक बड़ी ही प्रसिद्ध कथा के बारे में बात करेंगें। यह कथा है किष्किंधा के राजा बालि की। श्रीरामचंद्र जी द्वारा बालि के वध की। बालि को मारकर सुग्रीव को राज्य दिलाने की।

इस कथा को अधिकांश लोगों ने पढ़ा होगा। टीवी पर देखा होगा। कहीं न कहीं सुना होगा।

दोस्तों, आज हम इस कथा को योगविज्ञान की मदद से देखेंगे। क्यों? क्योंकि अनेक शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कथा रहस्यमयी है। अपने प्रचलित अर्थ से अलग किन्हीं अन्य तथ्यों की तरफ संकेत करती है। श्रीरामचंद्र जी, बालि और सुग्रीव की इस कथा का वास्तविक अर्थ योगविज्ञान के जरिये ही समझा जा सकता है। अगर हम इस कथा में छिपे संकेतों को समझ लें, तो बहुत लाभ उठा सकते हैं।


"आइये, सबसे पहले एक प्रश्न लेते हैं। राम और बालि की इस कथा को गूढ़ रूप में क्यों लिखा गया? इसमें कुछ रहस्य छिपाए क्यों गए?"

" दोस्तों, हमारे धर्मग्रंथों में बहुत जगहों पर अटपटे प्रसंग मिलते हैं। इनका शाब्दिक अर्थ भी अटपटा, फिजूल और अविश्वसनीय लगता है। इन प्रसंगों को व्यासकूट कहा जाता है। व्यास कूट मतलब? वैसी कोड भाषा code language जिसे कोई योगविज्ञान का जानकार ही cra…

रानी लक्ष्मीबाई: वीरता की अनमिट कहानी Rani Laxmibai: Indian epitome of Bravery

दोस्तों, आज हम बात करेंगे रानी लक्ष्मीबाई के बारे में। उनका गौरवशाली व्यक्तित्व हमारे इतिहास में अनूठा और विशिष्ट स्थान रखता है। वह उन गिनी चुनी विभूतियों में हैं जिनके वजूद एवं विचारों को अंग्रेजों ने हर तरीके से मिटा देने की कोशिश की। लेकिन हार गए। भारत की साधारण जनता ने उन्हें लोकगीतों, दंतकथाओं और मौखिक इतिहास के जरिये जीवित रखा। पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के हृदय में उनकी कहानी चलती आयी।

लक्ष्मीबाई किसी राजसी खानदान से नहीं थीं। उन्होनें विधिवत रूप से सैनिक शिक्षा भी नहीं प्राप्त की थी। वह भारत की उस जनभावना का प्रतीक थीं जिसने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। उस दौर के सबसे धूर्त अंग्रेज़ जनरल ह्यूरोज को भी कहना पड़ा-" जितने योद्धाओं से सामना हुआ है, उनमें रानी अकेली मर्द थी"।  लक्ष्मीबाई ने अपने छोटे से जीवन में बहुत भयंकर युद्ध लड़े। दोनों हाथों से तलवार चलाती हुई।अपने छोटे से पुत्र को पीठ पर बांधकर लड़ते हुए। युद्ध के मैदान में उनका स्वरूप देखकर शत्रुओं के दिल दहल जाते थे!

दोस्तों, आज हम उन घटनाओं एवं परिस्थितियों की चर्चा करेंगे जिन्होंने एक साधारण घर की सीधी साधी बालिका क…