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Showing posts from March, 2019

योग के लाभ: एक संक्षिप्त विश्लेषण Benefits of Yoga: A brief Analysis

दोस्तों, योग से लाभ होता है।ये बात आज सब मानते हैं।किस तरह के लाभ होते हैं, आप सुनते भी होंगे। जैसे?
योग प्राणऊर्जा को बढ़ाता है।वात, पित्त, कफ त्रिदोषों को संतुलित करता है।सुषुम्ना के चक्रों को balance करता है।नाड़ियों के अवरोध दूर करके उनकी कार्यशक्ति बढ़ाता है।.....आदि।
अब एक प्रश्न का उत्तर दीजिये- क्या आपको ऊपर लिखे लाभ समझ में आ रहे हैं?
अगर आपको त्रिदोष, सुषुम्ना, नाड़ी चक्र आदि बातें समझ में नहीं आतीं तो ये बिल्कुल स्वाभाविक है।
क्यों?
क्योंकि ये योग के ग्रंथों में लिखी classical terms हैं।एक आम आदमी के लिए ये जटिल शब्द हैं क्योंकि उसने योग की किताब नहीं पढ़ी।योग के बारे में बताने के लिए अक्सर लोग इन जटिल शब्दों का use करते हैं और आम आदमी को लगता है- " ये तो मुश्किल चीज़ है"। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।
आइये, आज हम एक आम आदमी के लिए योग के लाभों को बिल्कुल सरल भाषा में समझें। समझते हैं कि योग करने से हमारे शरीर को क्या क्या लाभ मिलते हैं।
आइये शुरू करते हैं।
योग का सबसे पहला फायदा क्या है? आपको पीठ सीधी करके बैठने की आदत पड़ेगी।योग की क्लास में ये चीज़ शुरू में ही आपको सीख…

योग के महापुरुष: महर्षि वशिष्ठ Yog ke Mahapurush: Maharishi Vashishth

दोस्तों, पिछले लेख में हमने चर्चा की थी महर्षि पतंजलि और अष्टावक्र के बारे में। आज हम इसे आगे बढ़ाते हुए कुछ और महापुरुषों के बारे में जानेंगे जिन्होंने योगविज्ञान में नए आयाम स्थापित किये और आम जनता को लाभान्वित किया। इन्होंने पूरे समाज को एक नई दिशा दी तथा शासकों ने भी इन्हें पूरा support दिया।
आइये शुरू करते हैं।
वशिष्ठ का नाम योग गुरुओं में बहुत ऊंचा है। वो भगवान राम के गुरु थे, एक महान ऋषि अर्थात महर्षि थे। वास्तव में रघुकुल राजवंश के गुरुओं की उपाधि वशिष्ठ हुआ करती थी।
" रघुकुल क्या था?"
" रघुकुल भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली राजवंशों में एक था।इनकी राजधानी को अयोध्या कहा जाता था।
"इनकी राजधानी का नाम अयोध्या क्यों पड़ा था"?
क्योंकि उसे किसी प्रकार से भी जीता नहीं जा सकता था।
अब आप अनुमान लगा सकते हैं- कि उस युग में वशिष्ठ की power क्या रही होगी!
वशिष्ठ किसलिए प्रसिद्ध थे?
अपनी योग साधना के लिए। योग का उनका व्यवहारिक ज्ञान उस समय में सबसे अधिक था।उनकी पत्नी अरुधंति भी गुणों में उनकी तरह थी। जनता में उनकी अथाह लोकप्रियता थी।
एक चीज़ और थी। उन्होंने योग की अपनी…

योग के महापुरुष: पतंजलि और अष्टावक्र Yog ke mahapurush: Patanjali and Ashtavakr

दोस्तों, अपने पिछले लेख में हमने ये जाना था कि योग की उत्पत्ति पहले एक दर्शन या विचारधारा के तौर पर हुई थी। आइये आज हम जानेंगे कि ये महान दर्शन कैसे व्यवहारिक रूप से एक विज्ञान के तौर पर उभरा और कैसे इस क्षेत्र में आचार्यों एवं महापुरुषों के द्वारा इसे जनता में लोकप्रिय बनाया गया।
आइये शुरू करें।
इसको सर्वप्रथम महर्षि पतंजलि ने विज्ञान के तौर पर develop किया और पातंजल योगसूत्र नामक ग्रंथ लिखा।
"इसमें क्या है"?
"195 सूत्र हैं जिन्हें follow करके समाधि को प्राप्त कर सकते हैं"
" समाधि क्या है"?
"  जब व्यक्ति खुद को समझ ले तो वो condition समाधि है।इसमें व्यक्ति सर्वशक्तिमान बन जाता है"
यहां एक रोचक चीज़ जानते हैं। पतंजलि कहते हैं कि बिना समाधि के हम अपने आप को नहीं जान सकते।
"ऐसा कैसे?"
"एक उदाहरण से समझते है।आप एक खाली कागज़ लीजिये।अब उसपर अपना परिचय या introduction लिखिए।बस एक शर्त है। आपके शरीर से संबंधित कोई data जैसे नाम, कद, वजन, देश,भाषा ,पद, बैंक बैलेंसआदि लिखना मना है।"
" शरीर से संबंधित data क्यों लिखना मना है"

योग: भारत में उत्पत्ति एवं विकास Yoga:Origin and Development

दोस्तों, पिछले दो लेखों में हमने योग का एक संक्षिप्त परिचय एवं महत्व समझा था।हमने ये भी जाना कि ये बहुत सारे लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ है।
आज हम समझेंगे योग से संबंधित कुछ general बातों को।जानने की कोशिश करेंगें कि योग  का ये विज्ञान भारत में develop कैसे हुआ।
आइये, शुरू करते हैं।
अधिकांश लोग ये मानते हैं कि तरह तरह के आसनों और प्राणायामों को करना ही योग है। उनकी ये धारणा बहुत स्वाभाविक है।क्यों? क्योंकि टीवी कार्यक्रमों एवं एवं अखबारों में योग के इसी पहलू को दिखाया जाता है।
लेकिन ये पहलू सम्पूर्ण योग का एक बहुत छोटा हिस्सा है।ये ठीक उसी तरह है कि कोई भारत के बारे में जानना चाहे और उसे केवल दो- तीन राज्य दिखाकर छोड़ दिये जायें।
"तो सच क्या है?"
"सच ये है कि योगासन और प्राणायाम योग के केवल शारीरिक पहलू को represent करते हैं जिसे हठयोग भी कहा जाता है।अगर आप केवल इनको जानते हैं तो समझ लीजिए, आप योग को बीस प्रतिशत ही जानते हैं"
आइये, आराम से और बिल्कुल सरल ढंग से समझें।
आज से कई हजार साल पहले दुनिया आदिम युग में जी रही थी।लेकिन भारत तब बहुत developed था। यहां के ल…

Famous personalities &Yoga:SomeThoughts

प्रसिद्ध लोग और योग: कुछ विचार
Famous personalities &Yoga:SomeThoughts

दोस्तों, योग के विषय में मेरे पिछले लेख को पसंद करने के लिए आप सब का धन्यवाद।
योग आज सफल लोगों की जीवनशैली का एक हिस्सा है जिसकी लोकप्रियता दुनिया के हर कोने में है। आज मैं  5 लोगों के विचार आपलोगों तक पहुँचाऊँगा जो अपने अपने क्षेत्रों में शिखर पर हैं और योग को अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं,साथ ही योग को promote भी करते हैं।पांचवें व्यक्ति के रूप में हमने महर्षि पतंजलि को चुना है जो प्राचीन काल में हुए थे और जिन्होंने योग को एक विज्ञान के रूप में स्थापित किया था।हम उनके विचारों को पढ़ने के साथ साथ एक संक्षिप्त विश्लेषण भी करते चलेंगे।
आइये, शुरू करते हैं-

1. नरेंद्र मोदी-" योग खुद से जुड़ने का तरीका है और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए बिना खर्च वाली हेल्थ insurance है। यह हमें मानसिक शांति और सेहत देता है।जब हम मन लगाकर इसकी practice करनी शुरू करते हैं तो ये हमारे जीवन का हिस्सा बनकर हमें स्व से परिचित कराता है"।

योग: एक परिचय Yoga: An Introduction

मनोविज्ञान के एक शोधार्थी ने पूछा है- क्या योग से व्यक्तित्व अर्थात personality को बदला जा सकता है?
ये एक बहुत बड़ा सवाल है। आजकल योग की हर तरफ धूम है।कई तरह की बातें हम योग गुरुओं से सुन रहे हैं। " योग भगाए रोग" "योग रखे नीरोग" " योग से बदलें जीवन" " योग में है सभी जीवन की सभी समस्याओं का हल"
दोस्तों, इस तरह की बातें आपने अक्सर किसी न किसी योग गुरु के मुंह से सुनी होंगी या अखबारों में पढ़ी होंगी।
आइये, इनपर विचार करते हैं। योग विशेषज्ञों, गुरुओं की राय लेते हैं।बिल्कुल सरल ढंग से इन चीजों को समझते हैं।

दोस्तों,सबसे पहले एक चीज़ समझ लीजिए- एक योग विशेषज्ञ और एक योग गुरु में काफी difference होता है। "कैसे?" एक आदमी किसी यूनिवर्सिटी से योग में पढ़ाई करके डिग्री हासिल करता है।योग में बीए, एमए, पीएचडी करता है। किसी संस्थान से जुड़कर या स्वतंत्र ढंग से practice करता है। ऐसे आदमी को आप योग विशेषज्ञ कह सकते हैं। एक आदमी योग में बहुत रुचि रखता है। किसी आश्रम, किसी गुरु के पास रहकर योग सीखता है।एकदम साधु की तरह रहता है, खाता पीता है। कई वर्षों तक आ…

राफेल:दुश्मनों को करेगा फेल

राफेल आजकल हर जगह चर्चा में है। जितने मुँह, उतनी तरह की बातें हो रही हैं।हमारे नेतागण तो इसपे तरह तरह के शोध करके मानों नोबेल प्राइज पाने की होड़ में लगे हैं।
कल रात को news देख रहा था। rafale पर लोगों के रिएक्शन पूछे जा रहे थे-
 न्यूज़ एंकर- क्या लगता है आपको, rafale के आने से क्या होगा?
एक व्यक्ति-हमारे पायलटों को पाक में घुसने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अपनी वायुसीमा में रहकर ही पाक विमानों को ढेर कर देंगे।
दूसरा- राफेल आ जाये बस। फिर तो ये सब दुश्मनों को फेल कर देगा।
तीसरा- rafale के आगे कोई दुश्मन नहीं टिक पायेगा।अकेला एक राफेल दुश्मन के पांच पांच विमानों पर भारी पड़ेगा।
यहां बताता चलूं कि ये तीसरी टिप्पणी ऐसे व्यक्ति द्वारा कही गयी है जो बहुत अच्छे विशेषज्ञ माने जाते हैं।

इच्छा तो नहीं थी कि इतने पॉपुलर टॉपिक पर कुछ लिखूं क्योंकि इसके बारे में तो सब जानते हैं।लेकिन फिर लगा कि जो हमलोग न्यूज़ में देख रहे हैं, वो काफी short में बताया जा रहा है।क्यों?क्योंकि न्यूज़ चैनलों पर अनेक बंदिशें होती हैं, उन्हें एक सीमित समय में ही सारी खबरें देनी होती हैं। अतः किसी भी टॉपिक का संतुलित विश्लेषण क…

लोक आस्था का प्रतीक: सूर्य Lok aastha ka pratik: Surya

धार्मिक आस्था की सरहदें नहीं होतीं। इसका एक प्रमाण मुझे कुछ दिन पहले मिला जब कनाडा के रहनेवाले एक मित्र ने मुझसे छठपूजा और सूर्य उपासना से संबंधित जानकारी मांगी।ये जानना सुखद लगता है जब सात समंदर पार का कोई व्यक्ति आपके यहाँ के लोकपर्व में रुचि दिखाए। उनको जबाब देने के बाद सोचा कि आपकी अपनी इस वेबसाइट पर भी इसपे आधारित लेख लिखा जाए।
चलिए शुरू करें।
सूर्य उपासना क्या है? तरह तरह के मंत्रों, विधि विधानों, स्तुतियों से सूर्य के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाना ही सूर्य उपासना है। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र सूर्य उपासना से ही संबंधित है।
सूर्य का महत्व क्या है?मानव इतिहास के प्राचीनतम उपलब्ध साहित्य वेदों में सूर्य को सृष्टि की आत्मा कहा गया है।यजुर्वेद में सूर्य को ईश्वर का नेत्र कहा गया है।यही कारण है कि हिन्दू अपने अधिकांश धार्मिक कार्यों को दिन में ही करते हैं जब आकाश में सूर्य की उपस्थिति होती है।
छठपूजा क्या है? ये सूर्य की उपासना का ही एक तरीका है जो मुख्यतः बिहार ,पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं झारखंड में प्रचलित है। इसमें कोई लिखित मंत्र नहीं होते।लोकगीतों के माध्यम से सूर्य की स्तुति होती है।आगे…

Internet: Reach and Impact

कुछ दिन पहले की बात है। मेरे एक भूतपूर्व सहयोगी प्रमोद की call आयी।
प्रमोद- भैया, एक सलाह चाहिए।
मैं- सब ठीक तो है?
प्रमोद- भइया, अंशु का व्यवहार बदल गया है।
इतना सुनते ही मुझे काफी आश्चर्य हुआ। अंशु इसके लड़के का नाम है जो 10th class का विद्यार्थी है।
प्रमोद- आप उसको समझाओ। हमलोगों की बात सुनने को तैयार ही नहीं।
मैं- बात क्या है?
प्रमोद- कल शाम को उसके net pack की validity खत्म हो गयी थी। उसने रिचार्ज करने के लिए 500 रुपये मांगे जो मैंने नही दिया। उसने बहस की तो मैंने डांट दिया। बस तभी से गुमसुम है।
मैं- उसका नंबर दो।
समस्या का तुरंत समाधान जरूरी था नही तो आज की युवा होती generation कोई भी कदम उठा सकती है।उसका नंबर लेकर मैंने फट से 509 रुपये का recharge किया जिसमें 4 GB डाटा प्रतिदिन मिलता है। इसके बाद अंशु को whatsapp call किया।
मैं- अंशु बेटा, तुमसे बहुत जरूरी काम है।इसी वजह से मैंने तुम्हारा net recharge भी करवा दिया है।मेरा काम भी करो और मजे से game भी खेलो।
अंशु-???
मैं- मुझे किसी को खूब अच्छे अच्छे goodmorning मैसेज व्हाट्सएप पर भेजना है। तुमको तो ये सब बहुत अच्छा आता है। जल्दी…

कुंभ:अनंत के साथ एकत्व की अनुभूति Kumbh: Realization of oneness with eternity

कुंभ : अनंत के साथ एकत्व की अनुभूति

कभी सोचा नहीं था कि  महाकुम्भ जैसे धार्मिक आयोजन के बारे में कुछ लिखूंगा। लगता था कि दशहरा ,दीपावली ,गणेशोत्सव जैसे धार्मिक उत्सवों की तरह यह भी एक लम्बे समय बल्कि महीनों तक चलनेवाला धार्मिक आयोजन है, लेकिन प्रयागराज कुम्भ में जाकर यह धारणा ध्वस्त हो गयी। उस मूलतत्व की एक झलक मिली कि क्यों हर बार करोड़ों की संख्या में लोग कुम्भस्नान को जाते हैं और कैसे ये परंपरा कई हजार सालों से ज्यों की त्यों चलती आयी है। 
प्रयागराज कुम्भ दर्शन के दौरान सन्यासियों ,पुजारियों, पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं से बातचीत एवं मेरे अनुभवों पर आधारित यह लेख आपको भारतीय संस्कृति के उस मूल तत्व से परिचित कराएगा जो सारे भारत को एक सूत्र में बांधकर इसे एक और अखंड बनाये रखती है।

शुरू करते हैं।

कुम्भ क्या है? इसके पीछे एक कहानी है -
एक बार देवताओं एवं असुरों  में दोस्ती हुयी। इसके पीछे स्वार्थ था। दोनों मानते थे कि समुद्र में resources हैं। लेकिन अकेले दम पर निकालना मुश्किल था। देवों के पास technology थी। असुरों के पास श्रमबल labour force था। दोनों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। बहुत कुछ मिला -…

भारत का मुकुट: जम्मू कश्मीर-भाग 2

भारत का मुकुट: जम्मू कश्मीर- भाग 1 में हमने भारत -पाक के बीच तनाव के मूल कारण कश्मीर समस्या के ऐतिहासिक पहलू को समझा था।
पिछ्ली कड़ी के अंत में कश्मीर समस्या जन्म ले चुकी थी। अब आगे चलते हैं।
दोस्तों, आज़ादी के समय किसी भी नए राज्य को भारत मे शामिल करने के लिए जरूरी था कि वहां का राजा दो documents के ऊपर signature करके भारत सरकार को दे दे-
1. Instrument of accession- ये वो अधिकारपत्र था जिसके आधार पर भारत की फौज और प्रशासन वहां जाकर कार्य कर सकते थे।
2. Instument of merger- मतलब? ये राज्य तन मन धन से भारत का एक हिस्सा हो गया।
हरिसिंह ने केवल पहला document ही sign किया जिससे भारत की फौज वहाँ जाकर उनकी रक्षा कर सके एवं भारत के कर्मचारी उनके ध्वस्त हो चुके प्रशासन को संभाल सकें। और दूसरा document? । जबतक विधिवत रूप से हम इसे लेते, मामला तो कहीं और जा चुका था! हरिसिंह ने धारा 370 को बड़े अच्छे से लपक लिया।
पाकिस्तान की फौज भारत से पिटकर भाग ही रही थी कि भारत संयुक्त राष्ट्र की शरण में जाकर पाक को जीवनदान दे बैठा। जी हां, एक तिहाई कश्मीर तो पाक के पास बचा ही रह गया जिसे उसने आज़ाद कश्मीर का न…

भारत का मुकुट: जम्मू कश्मीर- Part 1

14 फरवरी 2019।पुलवामा।केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जवानों का एक काफिला जम्मू श्रीनगर highway पर था।एक सिरफिरे एवं पागल आतंकवादी ने कायरों की तरह विस्फोट करके एक बस को उड़ा दिया।देश के लिए duty करते हुए चालीस जवान वहीं शहीद हो गए।
पिछले 15 दिनों से पूरे भारत में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा है।हर तरफ से बदला लेने की मांग हो रही थी।लिया भी गया।26 फरवरी को हमारे मिराज विमानों ने आतंकियों के जोश को जमींदोज़ कर दिया जिसे surgical strike 2.0 भी कहा गया।
आजकल हर तरफ इससे संबंधित खबरें जारी हैं।अतः विस्तार से लिखने की जरूरत नहीं।
पिछले दिनों एक मित्र के यहां गया। टीवी पर खबरें आ रही थीं। उनके 12 साल के बच्चे ने मुझसे पूछा- पाकिस्तान आखिर हमसे लड़ता क्यों रहता है? क्या हमारे जवान ऐसे ही मरते रहेंगे?
ये बहुत छोटे सवाल थे।लेकिन मैं विचलित हो उठा।क्यों? मैं इसका सटीक उत्तर नहीं जानता था।और बच्चे को कोई काल्पनिक उत्तर देना ठीक नही था। सवाल को टाल गया।जरूरी काम बताकर मित्र से विदा ले ली।
घर आया। इतिहास की पुस्तक पलटी।wikipedia देखा।internet पर लेख पढे।युद्धों को पढ़ा।इसी क्रम में यह निर्णय किया कि मुझे जो …