Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2018

कुछ बातें अतीत की: कुछ वर्तमान की

आइये, पंद्रह- बीस साल पीछे चलते हैं।एक गाँव है।शहर से दूर।कच्ची सड़क। मिट्टी के मकान। खपरैल की छत।गाँव मे दो तीन मकान पक्के भी हैं लेकिन बहुमत कच्चे का ही है। सारे घरों में कुछ चीज़ें common हैं। मिट्टी के घड़े। कांसे पीतल के बर्तन। मिट्टी के चूल्हे। और? और तुलसी का पौधा। हर घर के आंगन में लगा तुलसी का पौधा। यही है वो जो हर घर को जीवंत कर रहा है! लोगों की आस्था का केंद्रबिंदु बना है! सुबह शाम इसके आगे दिया जलता है। आरती- भजन होते हैं। घर के बच्चे भी बड़ों को देखादेखी इसके आगे शीश झुकाते हैं। कुछ याद आ रहा है आपको? शाम घिरतीआ रही है।अन्धेरा फैलने लगा है। बच्चे भी खेल कूदकर आंगन में आ चुके हैं। तभी घर की कोई स्त्री , माँ, चाची, दादी, कोई भी, एक दीया जलाकर लाती है। तुलसी वृक्ष के सामने रखती है। कुछ प्रार्थना करती है। और देखिए, बच्चे भी वहाँ जाकर, हाथ जोड़कर सिर झुका चुके हैं। वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा भविष्य की पीढ़ी में संचारित या transfer हो रही है। ढलती हुई शाम। और जलता हुआ दीपक। अन्धकार को विदीर्ण करता प्रकाश।जिन्होंने भी इस पल को अंदर तक जिया है, वो जिंदगी में कभी हार नहीं मानते। शहर तो सं…

अटल बिहारी वाजपेयी: एक नेता जिसने जनता के दिलों पर राज किया

हिमाचल प्रदेश। साल था 1993। एक विमान धर्मशाला की तरफ उड़ा जा रहा था। धर्मशाला मतलब पहाड़ियों के बीच बसा हिमाचल प्रदेश का एक विख्यात पर्यटन स्थल। अचानक पायलट को लगा कि वह रास्ता भूल गया है। सड़क पर अगर कोई रास्ता भूल जाये तो चिंता नहीं होती।पर हजारों फ़ीट ऊपर आसमान में रास्ता भटकने का मतलब है, सीधे अपनी मौत को बुलाना।खैर, ऐसी परिस्थिति में एक काम किया जा सकता है, अपने नीचे देखते रहिये। जहां भी हवाई पट्टी दिखे, बस लैंड कर जाइये।लेकिन निर्जन पहाड़ियों में हवाई पट्टी भला कौन बनाकर रखता है!वो तो धर्मशाला में ही थी अथवा जिला मुख्यालय स्तर के किसी शहर में ही हो सकती थी। अब पायलट तो इस भूभाग से परिचित था नही- अगर होता तो भटकता नहीं न! खैर, मरता क्या न करता!उसने अपने यात्रियों से पूछा- क्या आप ऊपर आसमान से धर्मशाला शहर को पहचान सकते हैं?
अब घबराने की बारी यात्रियों की आयी थी।लेकिन एक यात्री बिल्कुल शांत रहा।कोई शिकन तक नहीं।बोला- अगर क्रैश ही होना है तो चिंता क्यों करूँ!मैं सो जाता हूँ।जगते हुए क्रैश हुआ तो ज्यादा तकलीफ होगी। बात कहने के निराले अंदाज एवं उसकी निश्चिंतता से पायलट का भय भी छूमंतर हो…

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा: The Indian National Flag

आज बात करते हैं अपने राष्ट्रीय ध्वज Indian National Flag के बारे में।जब भी हम अपने तिरंगे झंडे को देखते हैं, जोश आ जाता है न! जी हाँ, वो तो आएगा ही। ये ध्वज हम एक अरब से ज्यादा लोगों की शान जो है!
Indian National Flag अर्थात हमारे राष्ट्रीय ध्वज के बारे में इतिहास हमें बताता है कि आज जिस ध्वज को हम पूरी शान के साथ फहराते हैं, वो हमें बड़े संघर्षों के बाद मिला है। हमारी ही बात नहीं, दुनिया के हर देश को उसका झंडा असंख्य बलिदानों के बाद ही मिला है। ऐसा क्यों? इसलिए कि झंडा हमारी एकता, अखंडता एवं independene का प्रतीक होता है। जो देश गुलाम थे उनका कोई झंडा था ही नहीं। हो भी कैसे?झंडे के लिए पहले संविधान होना चाहिए। क्योंकि जबतक झंडा संविधान से approved न हो तबतक वो पूरे देश में मान्य कैसे होगा! हमारे तिरंगे झंडे को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा के द्वारा स्वीकृत किया गया था।
                     The Indian National Flag
तिरंगे को विश्व के सबसे सुंदर राष्ट्रीय ध्वजों में एक माना जाता है। इसमें समाहित हर रंग, बीच में मौजूद चक्र एक खास अर्थ रखते हैं।
केसरिया है बलिदान का प्रतीक । ये बताता है …

महर्षि वाल्मीकि: The person who selected right path

महर्षि वाल्मीकि का नाम भला कौन नहीं जानता! उन्होंने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की, जिसमें करोडों लोग श्रद्धा रखते हैं। उन्हें आदिकवि भी कहा जाता है क्योंकि भाषा के शब्दों को गाने योग्य काव्य के रूप में रचने की शुरुआत उन्होंने ही की थी।
ये तो है उनका सामान्य परिचय। उनके बारे में अनेक कहानियां हैं।अनेक मान्यताएं हैं। सबमें दो बातें common हैं- पहली,उनका प्रारंभिक जीवन उनकी बुरी habits के चलते बहुत बुरा बीता था। दूसरी बात, उन्होंने कठिन परिश्रम एवं लगन से सारी कमियों को conquer किया और अपने समय के सबसे बड़े scholar बने- रामायण जैसी रचना लिखी।आज अष्टयाम डॉट कॉम का यह लेख इन्हीं वाल्मीकि जी पर केंद्रित है।
वाल्मीकि का नाम रत्नाकर हुआ करता था।अपने प्रारंभिक जीवन में साहित्य, कविता,ज्ञान- विज्ञान के बारे में वो कुछ नहीं जानते थे। उनका बचपन घनघोर जंगल में बीता। वो कभी स्कूल- कॉलेज नहीं गए। जवान हुए तो परिवार का बोझ भी उनपर आ पड़ा।आगे जाकर उन्होंने एक ऐसा career चुन लिया जो कहीं से भी ठीक नही था। वो उस जंगल से गुजरने वाले यात्रियों को लूटने लगे। लेकिन कहते हैं न- ईश्वर हर किसी को मौका देता है…

अष्टयाम- सकारात्मक विचारों को समर्पित एक वेबसाइट

आज विजयादशमी है- अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक।कहते हैं,आज ही के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण का वध किया। एक मानव ने दानवों के राजा पर विजय प्राप्त की।राम- रावण संघर्ष को भले ही हजारों साल बीत गए, लेकिन इसके पात्रों की चर्चा आज भी होती है। ये कथा हमें आश्वस्त करती है कि बुरे और अच्छे विचारों के बीच जब भी संघर्ष होता है, आखिरी विजय अच्छे विचारों की ही होती है।
दोस्तों, एक संघर्ष हमारे भीतर भी चौबीसों घंटे चलता रहता है- उत्साह-निराशा,डर-साहस, क्रोध- करुणा, सफलता- असफलता से संबंधित हजारों विचार हमारे मन में एक - दूसरे से उलझते ही रहते हैं। सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के इस संघर्ष में हमारा मानसिक दृष्टिकोण एवं आत्मविश्वास ही हमें विजयी बनाता है।
ये वेबसाइट अष्टयाम डॉट कॉम आपके भीतर मौजूद सकारात्मक विचारों को अपने लेखों के माध्यम से मजबूत करने का कार्य करेगी। इस वेबसाइट पर आगे आने वाला हर लेख आपकी सकारात्मकता अर्थात mental positivity को बढ़ायेगा ताकि आप अपनी life में आने वाले हर संघर्ष में अपने आत्मविश्वास को बनाये रख सकें। अष्टयाम एक संस्कृत शब्द है जिसका…